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२०८२ माघ २६ गते , सोमबार
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क्रिसमस पर परमेश्वर मे जीवनक अर्थ खोजू (मैथिली मे)
क्रिसमस पर परमेश्वर मे जीवनक साँच्चा अर्थ खोजू
हर उत्सवक समय—विशेष रूप सँ क्रिसमस पर—हमरा चारू दिस सजावट, रंग-बिरंग बत्ती, तारा, मोमबत्ती आ अनेक प्रतीक देखाए पड़ैत अछि। सड़क झिलिमिली होइत अछि, घर इजोत होइत अछि आ माहौल उत्सवमय बनैत अछि। ई बाहरी सजावट सुंदर जरूर अछि, मुदा ई संदेशक मूल बात नहि अछि। समस्या तऽ ओहि समय शुरू होइत अछि जँ हम सजावट आ प्रतीकक अर्थ खोजैत रहैत छी आ अपन जीवनक साँचो अर्थ ओहि परमेश्वर मे खोजनाइ बिसरि जाइत छी, जे स्वयं हमरा सभक लेल आयल।
सजावट प्रेरणा द सकैत अछि, मुदा जीवन बदल नहि सकैत अछि। बत्ती बाहरक अंधकार दूर क सकैत अछि, मुदा मनुष्यक हृदयक अंधकार नहि। प्रतीक महान सत्यक ओर इशारा करैत अछि, मुदा ओ स्वयं सत्य नहि अछि। जँ विश्वास केवल बाहरी देखावा तक सीमित भ जाइत अछि, तऽ ओकर शक्ति धीरे-धीरे खत्म भ जाइत अछि। परमेश्वर संसार मे एहि लेल नहि आयल जे लोक प्रतीक पर झगड़ा करय, बल्कि एहि लेल आयल जे टूटल जीवन पुनः स्थापित हो, हरायल लोक भेटाय आ मनुष्यक परमेश्वर सँ मेल हो।
यीशु मसीहक जन्म केवल सजावट करबाक अवसर नहि अछि; ई मानव इतिहास मे परमेश्वरक प्रत्यक्ष हस्तक्षेप अछि। परमेश्वर दूर सँ संदेश नहि भेजलथिन—उ स्वयं आयल। उ मानवीय दुःख, कमजोरी आ सीमाक भीतर प्रवेश केलथिन। महल मे नहि, बल्कि गोशाला मे जन्म लऽ क मसीह देखौलथिन जे जीवनक अर्थ बाहरी चमक, पद आ परंपरा मे नहि, बल्कि परमेश्वर सँ संबंध मे अछि। देहधारण जीवनक सब सँ गहिर प्रश्नक उत्तर दैत अछि—“हम कियैक छी?” ई उत्तर प्रतीक मे नहि, बल्कि उद्धारकर्ता मे अछि।
बहुत लोक जीवनक अर्थ परंपरा, दर्शन, सफलता, धर्म आ उत्सव मे खोजैत अछि। मुदा जँ जीवन मे उद्देश्य नहि होइत अछि, तऽ सब सँ सुंदर उत्सवो खोखला लगैत अछि। क्रिसमसक सजावट कुछ दिन मे हटा देल जाइत अछि, बत्ती निभ जाइत अछि, गीत रुक जाइत अछि—मुदा आत्मा पहिचान, क्षमा, आशा आ अनंतताक प्रश्न पूछैत रहैत अछि। एहि प्रश्नक उत्तर केवल परमेश्वर द सकैत छथि, कियैक तऽ ओ जीवनक सृष्टिकर्ता छथि। मसीह मे आय क परमेश्वर मानव जीवनक साँचो मूल्य आ दिशा प्रकट केलथिन।
परमेश्वर मे जीवनक अर्थ खोजनाइ बाहरी प्रदर्शन नहि, बल्कि भीतरी आत्मपरीक्षण अछि। ई हमरा हृदय, प्राथमिकता आ परमेश्वर सँ संबंधक जाँच करैत अछि। यीशु संस्कृति सजाबय नहि आयल; उ मानव हृदय उद्धार करय आयल। उ प्रतीकक प्रशंसा नहि, बल्कि अपन पीछे चलबाक बुलाहट देलथिन। हुनकर आह्वान सरल मुदा गहिर छल—मन बदलू, विश्वास करू, परमेश्वर सँ प्रेम करू आ मनुष्य सँ प्रेम करू। एहिये सँ जीवन अपन साँचो अर्थ पबैत अछि।
जँ हम केवल प्रतीक पर केंद्रित रहैत छी, तऽ उद्धारकर्ता गुमाय देबाक खतरा रहैत अछि। जँ हम बत्ती आ सजावट पर विवाद करैत छी, तऽ संसारक ज्योति यीशु मसीह केँ बिसरि जाइत छी। मसीह मौसमी अतिथि बनि क नहि आयल; उ जीवनक प्रभु बनि क आयल। हुनकर उपस्थिति दुःख मे अर्थ, कमजोर केँ गरिमा, पापी केँ क्षमा आ मृत्यु पार आशा दैत अछि—जे कोनो सजावट नहि द सकैत अछि।
एहि लेल, हमर उत्सव हमरा भीतर आ ऊपर—परमेश्वर दिस—ले जाय। बत्ती केवल सुंदरता नहि, बल्कि अंधकार मे चमकैत ज्योतिक स्मरण कराबय। प्रतीक विवाद नहि, बल्कि भक्ति उत्पन्न करय। सब सँ महत्वपूर्ण बात—हम अपन जीवनक अर्थ परमेश्वर मे खोजू, कियैक तऽ उ हमरा एतेक मूल्यवान बुझलथिन जे स्वयं आयल।
जँ जीवन परमेश्वर मे जरा गाड़ैत अछि, तऽ उत्सव मे गहिराई अबैत अछि। उहाँ बिना, सब सँ चमकदार बत्तीओ खाली रहैत अछि। संदेश स्पष्ट अछि—सजावट पर रुकू नहि, गहिर जाइए। परमेश्वर केँ खोजू। ओहिये मे जीवनक साँचो अर्थ अछि।